एक राजा रानी की कहानी

राजा का अधिकतर समय अपनी बड़ी रानी के साथ बीतता था. क्योकि वह बहुत ही सुशील और व्यवहार कुशल थी. राजा को हमेशा उचित सलाह देती थी. वह राज्य की परेशानियों का हल निकलकर राजा को बताती थी. राजा की छोटी रानी थी वह बहुत ही कपटी और धूर्त थी. हमेशा अपनी तारीफ सुनना पसंद करती थी.

एक राजा रानी की कहानी

एक राजा रानी की कहानी – (Raja Rani ki Kahani)

बहुत समय पहले की बात है. एक स्वर्णनगरी नामक राज्य था. यह राज्य हर संसाधन से संपन्न था. इस राज्य की प्रजा खुश थी. किसी को किसी चीज़ की कमी नहीं थी. स्वर्णनगरी के राजा की दो रानियाँ थी. बस राजा को एक बात की चिंता खाए जा रही थी की उसकी कोई संतान नहीं थी.

राजा का अधिकतर समय अपनी बड़ी रानी के साथ बीतता था. क्योकि वह बहुत ही सुशील और व्यवहार कुशल थी. राजा को हमेशा उचित सलाह देती थी. वह राज्य की परेशानियों का हल निकलकर राजा को बताती थी. राजा की छोटी रानी थी वह बहुत ही कपटी और धूर्त थी. हमेशा अपनी तारीफ सुनना पसंद करती थी.

छोटी रानी दासी – Chhoti Rani ki Daasi

छोटी रानी के एक दासी थी जो जादू टोना करना जानती थी और कई लोगो पर उसने इसका प्रयोग करके उनको बर्बाद किया था. दासी यह चाहती थी की छोटी रानी के किसी तरह से एक संतान हो जाये जिससे वह राज्य की महारानी बन जाये. इससे दासी को अपनी मनचाही तरीके से राज्य में शासन करने का मौका मिल सके. परन्तु दासी अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सकी. और उसके मंसूबो में पानी फिर गया.

सन्यासी का राजा रानी को आशीर्वाद – Sanyasi ka Raja Rani ko Ashirvad

एक दिन राजा अपनी बड़ी रानी के साथ वन विहार को गए थे वह उन्हें एक सन्यासी मिले. राजा रानी ने सन्यासी का काफी स्वागत सत्कार किया.
राजा के इस सेवा से सन्यासी बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने राजा रानी को शीघ्र ही माता पिता बनने का आशीर्वाद दे दिया जिसे सुनकर राजा रानी अति प्रसन्न हुए और महल वापस आ गये. छोटी रानी को जब यह बात पता चली तो वह दुखी हो उठी उसने राजा से एक वचन लिया की जब बड़ी रानी को प्रसव पीड़ा हो तो वह और उनकी दासी ही उनके पास रहेगी वही सारा कार्य करेगी. राजा ने छोटी रानी की बात मन ली.